Brooklyn Bridge

Brooklyn Bridge

Brooklyn Bridge | ब्रुकलिन ब्रिज

Brooklyn Bridge | ब्रुकलिन ब्रिज
Brooklyn Bridge | ब्रुकलिन ब्रिज

वर्ष 1852 में जर्मन अप्रवासी इंजीनियर John Augustus Roebling ने संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क के मैनहट्टन से लॉन्ग आइलैंड के ब्रुकलिन को स्टील के बने सस्पेंडेड पुल से जोड़ने का सपना देखा।
सबने तब जॉन को पागल करार दे दिया।
पर जॉन ऑगस्टस रोएबलिंग अपने धुन का पक्का था। हाँ, एक शख़्स को जॉन पर भरोसा था।
वह था जॉन का बेटा Washington Roebling
पन्द्रह वर्ष तक लगातार प्रयास के बाद अंततः 1867 में सीनेट ने जॉन को पुल निर्माण की इजाज़त दे दी।
तब लगभग लोगों ने दोनों बाप-बेटे को पागल करार दे दिया कि यह असम्भव कार्य कभी नहीं हो पायेगा।
पुल मैनहट्टन व ब्रुकलिन के मध्य ईस्ट नदी पर 1825.40 मीटर लम्बा, 25.90 मीटर चौड़ा, 486.30 मीटर स्पैन तथा जल की सतह से 84.30 मीटर ऊंचा बनना था।
यह दुनिया का तब का सबसे लम्बा पुल बनना था।
जॉन रोएबलिंग की देखरेख में काम शुरू हुआ।
परन्तु वर्ष 1869 में पुल बनाने के क्रम में ही जंग लगी कील पैर में गड़ जाने से जॉन को टेटनस हो गया और असमय ही जॉन की मृत्यु हो गयी।
तब वाशिंगटन महज़ 32 वर्ष का था।
सबने सोचा कि बाप-बेटे की चिरप्रतीक्षित योजना ख़त्म हो गयी।
पर वाशिंगटन, जॉन रोएबलिंग का बेटा था।
अपने बाप की तरह ही धुन का पक्का। जॉन मरने से पहले सारी योजना व आर्किटेक्चर वाशिंगटन को बता गया था।
आर्किटेक्चर नव-गोथिक स्टाइल में बनना था, जो 17 वीं सदी में इंग्लैंड में शुरू हुई थी।
अब वाशिंगटन आगे बढ़ा। परन्तु स्टील आधारित सस्पेंडेड ब्रिज निर्माण का यह अनोखा कार्य तब दुनिया में कहीं नहीं हुआ था इतने बड़े स्तर पर।
इसकी निर्माण पद्धति इतनी पेचीदा थी कि इसके निर्माण में लगे कई मजदूरों को बीमार होना पड़ा।
जनवरी 1870 में ही स्वयं वाशिंगटन को पक्षाघात का शिकार होना पड़ा ऐसा, कि उसके सम्पूर्ण शरीर को लकवा मार गया।
केवल एक उंगली हरकत करती थी अब। वाशिंगटन अब केवल अपनी एक उंगली व आँखों से इशारे करता। बोल भी नहीं सकता था..😢 अब क्या हो?
पहले पिता गए, फिर तुरन्त पुत्र का पूरा शरीर बेकार हो गया।
सबने कहा कि नहीं माने पिता-पुत्र, तो अब भोगें..!!
ऐसे में काम आई स्त्री-शक्ति की बेहतरीन मिसाल बनकर वाशिंगटन रोएबलिंग की पत्नी Emily Warren Roebling..।
एमिली ने पहले तो अपने पति की हरकतों को पकड़ना शुरू किया कि वाशिंगटन कहना क्या चाहता है।
फिर जहाँ पुल का निर्माण हो रहा था, वहीं पास में एक फ्लैट लिया गया जहाँ से निर्माण-कार्य को वाशिंगटन देख पाता।
एमिली ने अपने पति वाशिंगटन की एक उंगली और आँखों के इशारे को बख़ूबी समझना शुरू किया। वाशिंगटन ने एक कोड विकसित किया, जिसे एमिली समझने लगी।
साथ ही एमिली ने तब पुल निर्माण से सम्बंधित जितनी भी गणितीय पढ़ाई थी, वह करती गयी।
और फिर 1870 से 1883 तक तेरह साल तक वह हुआ, जिसकी परिकल्पना भी तब किसी ने नहीं की थी..!!
एमिली लगातार अपने पति के इशारों के आधार पर अपनी टीम के तमाम इंजीनियर्स व श्रमिकों को निर्देश देती गयी और औद्योगिक दुनिया का सातवां अजूबा यानी आज का Brooklyn Bridge | ब्रुकलिन ब्रिज बनकर तैयार हो गया, जिसे तब दुनिया के तमाम पुल-निर्माण विशेषज्ञों ने असम्भव कार्य करार दिया था।
उस छह लेन के तब के दुनिया के सबसे लम्बे पुल को 24 मई, 1883 को पार करने वाली पहली इंसान बनी, स्त्री-शक्ति की बेहतरीन मिसाल- Emily Warren Roebling..👍👍

Brooklyn Bridge | ब्रुकलिन ब्रिज
 Brooklyn Bridge | ब्रुकलिन ब्रिज

1972 में ‘The Great Bridge’ नाम से इस पर किताब लिखी David McCulloughने जिसमें पुल निर्माण की इस विशेष तकनीक को विस्तार से समझाया गया है।
फिर 1981 में इस किताब पर आधारित फिल्म बनाई Ken Burns ने Brooklyn Bridge | ब्रुकलिन ब्रिज
इंसान चाह ले, तो क्या नहीं हो सकता। शुरुआत में दुनिया आपको सिरफिरा करार दे, तो सिरफिरा ही सही। कुछ ठान लीजिये, तो अपने सपने को टूटने मत दीजिये चाहे रास्ते में कितने ही काँटें क्यों न गड़ें हों। रास्ते की चिंता कीजियेगा, तो मंज़िल बुरा मान जाएगी।
So keep going.
कुमार प्रियांकजी  द्वारा

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